What Is Insurance | What Is Insurance Policy
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| What Is Insurance | What Is Insurance Policy |
बीमा एक प्रकार का अनुबंध है दो या अधिक व्यक्तियों में ऐसा समझौता जो कानूनी रूप से लागू किया जा सके अनुबंध कहलाता है बीमा अनुबंध का व्यापक अर्थ है कि बीमा पत्र में वर्णित घटना के घटित होने पर बीमा करने वाला एक निश्चित धनराशि बीमा कराने वाले व्यक्ति को प्रदान करता है बीमा कराने वाला जो सामाजिक प्रभाव याद बीमा करने वाले को देता रहता है वहीं इस अनुबंध का प्रति दे है बीमा शब्द फारसी से आया है जिसका भावार्थ है जिम्मेदारी लेना।
बीमा वास्तव में बीमा करता और बिमाकृत के बीच अनुबंध है जिसमें बीमा करता बीमा कृत्य से एक निश्चित रकम के बदले किसी निश्चित घटना के घटित होने पर एक निश्चित रकम देता है या फिर भी माकृत की जोखिम से होने वाले वास्तविक हनी की क्षतिपूर्ति करता है।
बीमा के आधार के बारे में सोचने पर पता चलता है कि बीमा एक एक तरह का सहयोग है जिसमें सभी बीमा कृत लोग जो जोखिम का शिकार हो सकते हैं प्रीमियम अदा करते हैं जबकि उनमें से सिर्फ कुछ को ही जो वास्तव में नुकसान उठाते हैं मुआवजा दिया जाता है वास्तव में जोखिम की संभावना वालों की संख्या अधिक होती है लेकिन किसी निश्चित अवधि में उनमें से केवल कुछ को ही नुकसान होता है बीमा करता भी मातृत्व पक्षों के नुकसान को शेष बीमा कृत पक्षों में बांटने का काम करती है।
बीमा किस स्थिति में हो सकता है-
जुआ खेलने या बाजी लगाने में भी दो व्यक्ति यही समझौता करते हैं कि अमुक घटना घटित होने पर दूसरा व्यक्ति अमुक धनराशि अदा करेगा लेकिन उसे बीमा नहीं कहा जा सकता क्योंकि स्वयं उस घटना के घटित होने या ना होने में उस बाजी लगाने वाले का कोई स्वतंत्र हित नहीं होता है अस्तु बीमा अनुबंध के लिए सामान्य अनुबंध के तत्वों के साथ साथ विवाहित का अस्तित्व आवश्यक है उदाहरण के लिए जीवन का बीमा कोई अजनबी व्यक्ति नहीं करा सकता क्योंकिकिसी के जीवित रहने या ना रहने में दूसरे का कोई स्वतंत्र हित नहीं होता है लेकिन दूसरे की पत्नी हो तो वह पहले के जीवित रहने में दूसरे का हित नहीं तो होने से पहले द्वारा जीवन का बीमा करना नियमानुसार होगा।
बीमा हित का अर्थ व्यापक है पति-पत्नी के जीवन रहने में एक दूसरे का हित तो स्पष्ट ही है कर्जदार के जीवन में महाजन का हित भी वैसा ही मान्य है इसी प्रकार संपत्ति बीमा के लिए बीमा हित उस संपत्ति के स्वामी को तो है ही यह हित उस व्यक्ति को भी उपलब्ध हो जाता है जिसे किसी अनुबंध के अंतर्गत कोई संपत्ति उपलब्ध होती है यदि नहीं संपत्ति पर कब्जा मात्र होने से भले ही वह कब्जा गैरकानूनी हो बीमा हेतु उपलब्ध हो जाता है उदाहरण के तौर पर अगर किसी दिवाली ए के पास उसके कब्जे में कोई संपत्ति है भले ही वह अधिकार स्वेटर कानूनी हो क्योंकि दिवाला निकलने के बाद उसकी सारी संपत्ति पर अधिकारी का अधिकार हो जाता है किंतु उस संपत्ति का बीमा कराने के लिए उस दी वालिए को भी अधिकारी मान लिया जाता है किसी अनुबंध द्वारा बीमा हित उत्पन्न होने का आधार उत्तरदायित्व अथवा दोनों हो सकते हैं उदाहरण के लिए जब कोई व्यक्ति कोई मकान किराए पर लेता है तो उस मकान की हिफाजत का कोई उत्तरदायित्व उस पर नहीं होता है लेकिन उस अनुबंध से किराएदार को सुरक्षा की सुविधा उपलब्ध होती है अतः उस मकान की सुरक्षा के देने के लिए भी उस किराएदार को विवाहित उपलब्ध हो जाता है।
बीमा की विशेषताएं एवं प्रकृति-
जोखिम से सुरक्षा
बीमा जोखिम उसे का सशक्त उपाय है जीवन में व्याप्त सभी अनिश्चितता ओं से व्यक्ति को चिंता मुक्त करता है यह जो कि मैं जीवन स्वास्थ्य अधिकारों तथा वित्तीय साधनों संपत्तियों से संबंधित हो सकती है अतः इन सभी जोखिम उसे सुरक्षा का एक उपाय बीमा ही है।जोखिम को फैलाने का तरीका
बीमा में सहकारिता की भावना के आधार पर एक सबके लिए वह सब एक के लिए कार्य किया जाता है समान प्रकार के जोखिम से घिरे व्यक्तियों को एकत्रित कर एक कोस का निर्माण किया जाता है ताकि एक व्यक्ति की जोखिम समस्त सदस्यों में बंट जाए वह किसी एक सदस्य को जोखिम उत्पन्न होने पर उसको से उस सदस्य विशेष को भुगतान कर दिया जाता है।
जोखिम का भी मित्रों से बीमा करता को हस्तांतरण
बीमा में समस्त बी मित्रों की जोखिम को बीमा करता को अंतरण कर दिया जाता है बीमा करता द्वारा विनीत को हानि होने पर निश्चित भुगतान कर दिया जाता है।बीमा एक प्रक्रिया
बीमा एक प्रक्रिया भी है जो पूर्व निर्धारित विधि से संचालित की जाती है पहले बीमित अपनी जोखिम का अंतरण बीमा करता को निश्चित प्रीमियम के बदले करता है उसके बाद बीमा कर्तव्य था द्वारा उच्च जोखिम के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान की जाती है।बीमा एक अनुबंध
बीमा में वैधानिकता का गुण होने से यह एक वैध अनुबंध है इसमें बीमित द्वारा बीमा करता को प्रस्ताव दिया जाता है वह बीमा करता द्वारा स्वीकृति देने पर निश्चित प्रतिफल के बदले दोनों के मध्य एक वैध अनुबंध निर्मित होता है जिसमें एक निश्चित घटना के घटित होने पर बीमा करता उसकी हानि की पूर्ति करने का वचन देता है।बीमा सहकारी तरीका है
बीमा सहकारिता की भावना पर आधारित है समान प्रकार के जोखिम ओके से घिरे व्यक्ति एक निश्चित कोष में अंशदान करते हैं उसमें से किसी भी सदस्य को जोखिम उत्पन्न होने पर उसको से भुगतान कर दिया जाता है इस प्रकार सब एक के लिए वह एक सबके लिए की भावना पर कार्य किया जाता है।जोखिम को निश्चित करना
बीमा में जोखिम को समाप्त नहीं किया जा सकता है परंतु जो खेमों की अनिश्चितता को कम हुआ निश्चित अवश्य किया जाता है विवि द्वारा बीमा कंपनी को जो कीमो का अंतरण किया जाता है वह एक निश्चित प्रतिफल से उस जोखिम का मूल्य निश्चित कर दिया जाता है अर्थात निश्चित प्रीमियम के बदले अनिश्चित हानियों को बीमा कंपनी द्वारा मिलने वाली बीमा राशि के रूप में निर्धारित कर दिया जाता है यही राशि बीमा दावा राशि कहलाती है।घटना के घटित होने पर ही भुगतान
बीमा में घटना के घटित होने पर ही भुगतान किया जाता है जीवन बीमा में घटना का घटित होना निश्चित है जैसे व्यक्ति की मृत्यु होना किसी विशेष बीमारी से ग्रसित होना बीमा अवधि का पूर्ण हो जाना तो ऐसी स्थिति में बीमित को भुगतान होता ही है परंतु सामान्य बीमा में घटना के घटित होने पर ही भुगतान होगा अन्यथा बीमित भुगतान हेतु उत्तरदाई नहीं माना जाएगा।बीमा अनुबंधों के प्रकार-
बीमा के अनुबंध दो प्रकार की श्रेणियों में विभाजित किए जा सकते हैं अनुबंध जिनमें क्षतिपूर्ति का उत्तर दायित्व होता है और वह जिनमें क्षतिपूर्ति का प्रश्न नहीं होता वरन् एक निश्चित धनराशि अदा करने का अनुबंध होता है क्षतिपूर्ति विषयक बीमा समुद्री भी हो सकता है और गैर सामग्री भी पहले का उदाहरण समुद्र द्वारा विदेशों को भेजे जाने वाले सामान की सुरक्षा का बीमा है और दूसरे का उदाहरण अग्नि भय अथवा मोटर का बीमा है क्षतिपूर्ति के अनुबंध में केवल क्षति की पूर्ति की जाती है यदि एक ही वस्तु का बीमा एक से अधिक स्थानों में है तो बीमा कराने वाले को क्षतिपूर्ति का ही धनराशि उपलब्ध होता है हां वह बीमा कंपनियां आपस में अदायगी की धनराशि का भाग निश्चित कर लेती है अतः पूर्ति अनुबंध का यह सिद्धांत जीवन बीमा तथा दुर्घटना बीमा पर लागू नहीं होता अतः जीवन बीमा तथा दुर्घटना बीमा कितनी भी धनराज के लिए किया गया है बीमा कराने वाले को अथवा उसके मनोनीत व्यक्ति को वह पूरी रकम उपलब्ध होती है।अग्नि बीमा
जैसा कहा जा चुका है अग्नि बीमा क्षतिपूर्ति का अनुबंध है अर्थात जो धनराशि बीमा पत्र पर अंकित है वह अवश्य मिल जाएगी ऐसा नहीं वरन उस सीमा तक छत पूर्ति हो सकेगी अग्नि बीमा अनुबंध यद्यपि किसी ना किसी संपत्ति के संबंध में ही होता है फिर भी वह व्यक्तिगत अनुबंध ही है अर्थात उक्त संपत्ति के स्वामी अथवा उस संपत्ति में विवाहित रखने वाले व्यक्ति को इस अनुबंध द्वारा क्षतिपूर्ति से आश्वस्त किया जाता है अतः अगर बीमा कराने वाले को किसी संपत्ति में स्वामित्व अथवा अन्य प्रकार का कोई ऐसा अधिकार नहीं है जिससे उसे भी माहित उपलब्ध होता हो तो वह बीमा करा लेने के बाद भी अनुबंध का लाभ नहीं उठा सकता।
संपत्ति का स्वामित्व बदलने पर यद्यपि माहित हस्तांतरित होता है किंतु बीमा अनुबंध अंग्रेजी कानून के अनुसार स्वता हस्तांतरित नहीं होता यदि संपत्ति विक्रय के साथ-साथ संबंधी अनुबंध लाभ भी हस्तांतरित करना अभिप्रेत हो तो भी बीमा करने वाले की अनुमति आवश्यक है भारतीय विधि में ऐसा नहीं है स्थिर संपत्ति हस्तांतरण विधि की धारा 49 और 133 के अनुसार कोई विपरीत अनुबंध के अभाव में संपत्ति प्राप्त करता बीमा अनुबंध का लाभ क्षतिपूर्ति के लिए मांग सकता है एक ही वस्तु में 1 से अधिक लोगों को कुछ कुछ अधिकार उपलब्ध हो सकते हैं एवं उनके विभिन्न प्रकार के विवाहित हो सकते हैं अतः वे सब अपने हितों के आधार पर किसी एक की संपत्ति पर अनेक बीमा करा सकते हैं।
अग्नि बीमा अनुबंध पर क्षतिपूर्ति का दावा करने के लिए यह आवश्यक है कि छाती का निकट कारण अग्नि ही हो और अग्नि का अर्थ है कि चिंगारी निकली हो किसी वस्तु के अत्यधिक दबाव के कारण वस्तु का झुलस जाना आग लगना नहीं माना जाता है बिजली गिरने से होने वाली हानि पर चिंगारी लगने की अनिवार्यता का नियम लागू नहीं होता विस्फोटक द्वारा हुई हानि अग्नि से हानि नहीं कहलाती भले ही वह विस्फोटक अग्नि से ही जुड़ा हुआ हो अगर इसका आधार यह है कि हानि का निकट कारण अग्नि ही होना चाहिए इसी प्रकार अग्नि लगने से उत्पन्न स्थिति में किसी तीसरे पक्ष द्वारा किए गए कृत्य से उत्पन्न हानि भी अग्नि हानि में शामिल नहीं की जाती लेकिन अग्नि अथवा जल हानि की सीमा का निर्धारण अग्नि बुझाने के तुरंत बाद ही नहीं किया जाता वरन उस समय किया जाता है जब उक्त बीमा संपत्ति बीमा कराने वाले को सौंपी जाती है।
अग्नि बीमा अनुबंध तीन प्रकार के होते हैं
1-मूल्यांकन तथा अमूल्य अंकित
2-संपूर्ण तथा अनिश्चित
3-निर्धारित तथा औसत
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मूल्य अंकित बीमा अनुबंध में यदि संपत्ति पूर्ण नष्ट हो जाए तो बीमा पत्र पर लिखित धनराशि बीमा करने वाले को अनिवार्य रूप से देनी पड़ती है और मूल्य अंकित बीमा अनुबंध में यदि पूर्ण संपत्ति नष्ट हो जाए तो उक्त संपत्ति का मूल्यांकन उस समय किया जाता है संपूर्ण तथा अनिश्चित अग्नि बीमा अनुबंध में वस्तुओं की सूची नहीं दी जाती वरुण अग्नि से हानि भय का बीमा सामान्य रूप में किया जाता है निर्धारित अग्नि बीमा अनुबंध में धनराशि निर्धारित बीमा पत्र पर लिखी रहती है औसत अग्नि बीमा अनुबंध में अनुपातिक क्षतिपूर्ति की जाती है अग्नि बीमा अनुबंध में पुनः स्थापन औसत तथा भागीदारी सिद्धांत लागू होते हैं।
जीवन बीमा
जीवन बीमा का प्रारंभ भी समुद्री बीमा के प्रायः साथ ही हुआ क्योंकि व्यापारिक यात्रा पर जाने वाले पौधों के मालिकों को जहां पूत नष्ट होने की संभावनाओं के विरुद्ध प्रबंध करने की चिंता थी वहीं उन जहाजों के कप्तानों का जीवन भी उतना ही मूल्यवान था साथ ही जब कारीगरों के संघों की स्थापना होने लगी और जन्म मृत्यु के लेख रहने के साथ आयु सीमा के औसत निकालने के नियमों की स्थापना की जा सकी तो जीवन बीमा अनुबंध का भी काफी प्रसार हो सका लेकिन उस समय के बीमा पत्रों की शर्तें काफी कठिन होती थी अमेरिकी गृहयुद्ध के पूर्व के जीवन बीमा अनुबंध की शर्तों के अनुसार बीमा पत्र का कोई अर्पण मूल्य नहीं होता था बीमे पर कोई कर्ज नहीं मिल सकता था बीमा प्रीमियम अदा करने के लिए अतिरिक्त समय नहीं मिलता था तथा आत्महत्या अथवा समुद्र यात्रा करने पर बीमा अवैध करार दे दिया जाता था।
जीवन बीमा दो व्यक्तियों बीमा कराने वाले और बीमा करने वाले के बीच ऐसा अनुबंध है जिसके अनुसार बीमा कराने वाला निश्चित अवधि तक सामाजिक अदायगी यों के बदले एक निश्चित धनराशि प्राप्त करने का वचन लेता है और बीमा कराने वाला उम्र निर्धारित अदाएं क्यों के बदले एक निश्चित रकम निश्चित समय पर अदा करने का वचन देता है अन्य प्रकार के बीमा अनुबंध हो और जीवन बीमा अनुबंध का अंतर यही है कि यह केवल मानव जीवन से संबंधित है और बीमा अनुबंध का प्रकार अथवा रूप कुछ भी हो उसमें मूल शर्त यही होती है कि अनुबंध के चालू रहने के काल में यदि बीमा कराने वाले की मृत्यु हो जाती है तो बीमा करने वाला बीमा पत्र लिखे धनराशि अदा करेगा मृत्यु के कारण केवल दो ही स्थितियों में ही इस अनुबंध को समाप्त कर सकता है यदि बीमा कराने वाले के ही किसी गैरकानूनी कृत्य द्वारा उसकी मृत्यु हो दूसरा यदि बीमा कराने वाले की मृत्यु ऐसे कारणों से हुई हो जिन्हें बीमा पत्र में मैं बाद कर दिया गया है इस विषय पर अंग्रेजी विधि और भारतीय विधि में कुछ अंतर है भारत में आत्महत्या का प्रयत्न करना तो अपराध है किंतु आत्महत्या अपराध नहीं है आधा आत्महत्या करने पर ऐसा ही बीमा अनुबंध समाप्त किया जा सकता है जिसके बीमा पत्र में या शर्त लिखित हो अंग्रेजी विधि में आत्महत्या का विषय श्रेणी में आता है।
जीवन बीमा में मिलने वाली धनराशि बीमा करने वाले पर कर्ज माना गया है।इसलिए संपत्ति हस्तांतरण विधि की धारा 3 के अंतर्गत संपत्ति की श्रेणी में आ जाता है तथा उक्त व्यक्ति की धारा 130 के अनुसार इसका हस्तांतरण किया जा सकता है अब जीवन बीमा के धनराज के हस्तांतरण की व्यवस्था बीमा विधि की धारा 38 39 में की गई है उक्त धनराशि का हस्तांतरण अभिहस्तांतरण द्वारा भी किया जा सकता है और नामांकन द्वारा भी किया जा सकता है नामांकन का अर्थ केवल या है कि बीमा कराने वाले के मृत्यु पर यदि नामांकित व्यक्ति जीवित हो तो बीमे की धनराशि उपलब्ध हो जाए नामांकन बिना सूचना के बदला जा सकता है यदि नामांकित व्यक्ति की मृत्यु हो जाए तो बीमा कराने वाले को ही धनराशि पाने का अधिकार प्राप्त हो जाता है आंगन में ऐसा नहीं है यदि एक बारइसलिए संपत्ति हस्तांतरण अभियान स्थगित कर दिए गए तो उसकी पूर्व अनुमति के बिना दूसरा अभ्यस्त अंकन नहीं किया जा सकता जज बीमा कराने के पहले अभी हस्तांतरित की मृत्यु हो जाए तो वे अधिकार बीमा कराने वाले को वापस नहीं मिलते वरन उस मृत व्यक्ति के उत्तराधिकारी ओं को उपलब्ध हो जाते हैं।
दुर्घटना बीमा
अनुबंध के अंतर्गत दो प्रकार की परिस्थितियां आ सकती हैं-
दुर्घटना बस दूसरों की क्षतिपूर्ति करने का भार।
दुर्घटना बस स्वयं अथवा संपत्ति को होने वाली हानि।
अन्य बीमाएं
स्वास्थ्य बीमा
गाड़ी का बीमा
बीमा की आवश्यकता-
व्यक्तियों का जीवन अनेक प्रकार की अनिश्चितताओं एवं योग्य मुंह से घिरा हुआ है उसे कुछ संपत्ति से संबंधित जोक में हैं तो कभी जीवन को जोखिम है अतः वह इन जख्मों के प्रति कैसे सुरक्षा प्राप्त करें इसी विचार ने बीमा को एक आवश्यकता बना दिया है वर्तमान औद्योगिक विकास का आधार ही प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से यदि बीमा को कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी मनुष्य जीवन को तनाव मुक्त करने हेतु धीमा एक बहुत ही आवश्यक बन गया है निम्न बिंदुओं के आधार पर बीमा की आवश्यकता का अनुमान लगाया जा सकता है_जोखिम के विरुद्ध सुरक्षा प्राप्ति हेतु संपत्तियों का इसलिए बीमा किया जाता है कि उनके नष्ट होने की संभावना निरंतर बनी रहती है या आकस्मिक घटना के घटित होने से अपने अपेक्षित जीवन काल से पहले ही वह निष्क्रिय हो सकती हैं
संभावित जोखिम को से सुरक्षा प्राप्ति हेतु बीमा कृत विषय वस्तु को क्षति भी हो सकती है और नहीं भी भूकंप आ भी सकता है और भूकंप नहीं भी आ सकता है भूकंप आए तो हो सकता है कि संपत्तियों को क्षति पहुंचे अथवा ना भी पहुंचे मनुष्य की मौत होना निश्चित है लेकिन मृत्यु कब होगी समय अनिश्चित है अतः इस अनिश्चितता या संभावित जोखिम ओर से सुरक्षा प्राप्ति हेतु बीमा आवश्यकता बन गया है।
जख्मों के प्रभाव को कम करने हेतु बीमा कृत विषय वस्तु को संरक्षण प्रदान नहीं करता है खतरे के कारण पहुंचाने वाली हानि को भी नहीं रोकता है खतरे को घटित होने से टला भी नहीं जा सकता है परंतु कभी-कभी बेहतर सुरक्षा तथा क्षति नियंत्रक उपायों द्वारा खतरे को टाला या तीव्रता को कम किया जा सकता है जिससे उस विषय वस्तु पर निर्भर व्यक्तियों के जीवन व संपत्ति पर खतरे के प्रभाव को कम अवश्य किया जा सकता है।
बचत व निवेश को प्रोत्साहित करने हेतु जीवन बीमा बचत और विनियोग का अच्छा स्रोत है जीवन के अन्य क्षेत्रों को बीमा द्वारा निश्चित करने हेतु अधिक राशि का बीमा कराता है जिससे अपव्यय कम होकर बचत को प्रोत्साहन मिलता है
विदेशी व्यापार विकास हेतु आवश्यक निर्यात व्यापार के प्रोत्साहन हेतु भी बीमा आवश्यक है बीमा माल के मूल्य की छाती की दिशा में भी महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रदान करता है वह जिससे निर्यातक क्षति की अनिश्चितता से मुक्त होकर निर्यात कर सकते हैं।
बृहद स्तरीय उपक्रमों के विकास हेतु आवश्यक वृहद स्तरीय उपक्रमों में इतनी अधिक जोखिम होती है कि बीमा के बिना प्रारंभ करना कठिन ही नहीं बल्कि असंभव भी हो सकता है।
वित्तीय संस्थाओं से वित्त प्राप्ति हेतु वित्तीय संस्थाओं द्वारा भी इन औद्योगिक और व्यावसायिक संस्थाओं को वित्त तभी प्रदान किया जाता है जबकि उनकी संपत्तियों का बीमा हो चुका है अतः भारी मात्रा में वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु भी बीमा आवश्यक है।
बीमा का महत्व-
सभ्यता के विकास के साथ-साथ बीमा का भी महत्व बढ़ता जा रहा है क्योंकि जो कि मैं दुर्घटनाओं व अनिश्चितता ओं में वृद्धि होती जा रही है आज हम ऐसे किसी देश की कल्पना नहीं कर सकते जो बीमा का लाभ नहीं उठा रहा हो आज भीमा प्रारंभिक स्वरूप से हटकर सामाजिक व व्यवसायिक जगत के प्रत्येक क्षेत्र में पदार्पण कर चुका है और अपनी उपयोगिता के आधार पर लोकप्रियता प्राप्त करता जा रहा है बीमा की उपयोगिता से प्रभावित होकर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री सर विंस्टन चर्चिल ने कहा था यदि मेरा बस चले तो मैं द्वार द्वार पर या अंकित करा दूं कि बीमा कराओ।
बीमा संपूर्ण मानव जाति एवं इससे संबंधित सभी वर्गों को सामाजिक एवं आर्थिक रूप से लाभ पहुंचाता है संक्षेप में कह सकते हैं कि आधुनिक युग में बीमा का महत्व दिन दोगुना रात चौगुना होता चला जा रहा है बीमा के महत्व थोड़ा लोगों को निम्नांकित वर्गीकरण द्वारा समझा जा सकता है।
पारिवारिक दृष्टि से महत्व
मितव्ययिता व बचत को प्रोत्साहन बीमा करा लेने से व्यक्ति को प्रज्ञा जी जमा कराने की चिंता रहती है अतः प्रारंभ से ही बचत करना व मित्र व्यवस्था को अपनाना प्रारंभ कर देता है यदि उसने प्रीमियम नहीं चुकाया हो तो वह उस धनराशि का अपव्यय भी कर सकता है प्रतिवर्ष बचत योजनाओं के अंतर्गत करोड़ों रुपए का प्रीमियम जमा होता है जो बचत की आदत से ही संभव है।जोखिम से सुरक्षा मनुष्य का जीवन ही नहीं व्यापार भी जख्मों से भरा हुआ है बीमा होना निश्चित ताऊ को दूर करता है बीमा के कारण ही व्यवसाय व उद्योग विकसित हुए हैं और व्यक्ति के रोजगार को उत्पन्न जोखिम भी समाप्त होती है।
विनियोग जीवन बीमा में विनियोग तत्व विद्यमान है व्यक्ति जो राशि प्रीमियम के रूप में जमा करवाता है वह उसकी बचत है निश्चित अवधि के पूर्ण होने अथवा निश्चित घटना के घटित होने पर भी मीत को अथवा उसके उत्तराधिकारी यों को निश्चित राशि प्राप्त हो जाती है इस प्रकार बीमा व्यक्ति के लिए सुरक्षा के साथ-साथ विनियोग का साधन भी बन जाता है।
करों में छूट बीमा से करो में भी छूट मिलती है भारत में चुकाई गई प्रीमियम की राशि पर आयकर में छूट प्राप्त की जा सकती है इसी प्रकार संपदा कर में भी छूट मिलती है।
वैधानिक दायित्व से मुक्ति व्यक्ति वैधानिक दायित्व बीमा करवा कर तृतीय पक्षकारों के प्रति अपने दायित्वों से मुक्ति प्राप्त कर सकता है निश्चित प्रीमियम के बदले बीमा कंपनी उन दायित्वों का भुगतान करेगी।
आर्थिक दृष्टि से महत्व
वर्तमान आर्थिक जगत की कल्पना भी मां के बिना अधूरी है व्यवसाय बीमा करवाने के रूपरेखा बना लेता है ताकि वह पूर्णशांति वतन नेता के साथ व्यवसाय क्रियाओं को पूरा कर सके विख्यात प्रबंध विचारक पीटर एफ ड्रकर के अनुसार यह कहना अतिश्योक्ति पूर्ण नहीं है कि बीमा के बिना औद्योगिक अर्थव्यवस्था कोई भी कार्य नहीं कर सकती है वास्तविक स्थिति यही है कि बीमा व्यवसाय के सफल संचालन के लिए अपरिहार्य है आर्थिक दृष्टि से बीमा का महत्व निम्न प्रकार से दृष्टिगोचर होता है।बच्चों को प्रोत्साहन बीमा अनिवार्य बचत का एक साधन है बीमा लोगों को छोटी-छोटी बचते करने की आदत को प्रोत्साहन देता है छोटी सी प्रीमियम के द्वारा व भविष्य के कई बड़े सपनों को आसानी से पूरा कर सकता है बीमा कंपनी को इन धीमी तो की छोटी छोटी बच्चों से करोड़ों रुपयों की प्रीमियम राशि प्राप्त होती है जो संचित होकर एक मोटी धनराशि बन जाती है जिन्हें बीमा कंपनी आवश्यक खर्चों की पूर्ति के पश्चात सामाजिक व राष्ट्रीय हित की योजनाओं में विनियोग कर देती है।
पूंजी निर्माण भी मित्रों से प्राप्त प्रीमियम की राशि को बीमा कंपनी जब विभिन्न राष्ट्रीय योजनाओं में विनियोग करती है तो उससे व्यापार व व्यवसाय को आसानी से पूछी प्राप्त हो जाती है वह कई लोगों को रोजगार भी प्राप्त हो जाता है।
विनियोग का साधन बीमा अनुबंध में प्रीमियम के रूप में प्राप्त राशि से पूजी का सृजन होता है इस पूंजी का विनियोग व्यापार व्यवसाय उद्योग व अन्य क्षेत्रों में किया जाता है जनता प्रत्यक्ष रूप से व्यवसाय में इतनी छोटी राशि का विनियोग कर लाभ प्राप्त नहीं कर सकती है पर इस अप्रत्यक्ष विनियोग के द्वारा भी मित्रों को धीमा पत्र पर अधिक बोनस की प्राप्ति होती है साथ ही राष्ट्र का आर्थिक विकास भी होता है।
औद्योगिकीकरण के लिए आधारभूत संरचना के विकास में सहायक बीमा संस्थाएं देश में शक्ति परिवहन संचार औद्योगिक संपदा आदि संसाधनों के विकास के लिए भी भारी मात्रा में धनराशि उपलब्ध कराती है जिसमें देश में औद्योगिकीकरण हेतु आधारभूत ढांचा तैयार होता है।
उद्यमिता का विकास बीमा के द्वारा उद्यमिता का विकास होता है क्योंकि व्यवसाय व उद्योग का बीमा होने से उद्यमियों को की जोखिम कम हो जाती है वह पूर्ण आत्मविश्वास व अनिश्चितता के साथ नए व्यवसाय को प्रारंभ करते हैं वित्तीय संस्थाओं के द्वारा ऋण भी आसान शर्तों पर प्राप्त हो जाता है कई तकनीकी व पेशेवर शिक्षा प्राप्त युवक के कई बड़े उपक्रम स्थापित कर रहे हैं।
साझेदारी व्यवसाय में स्थायित्व साझेदारी फर्म में किसी साझेदार की मृत्यु होने पर या अचानक कोई जोखिम उत्पन्न होने पर फर्म में भारी संकट उत्पन्न हो सकता है ऐसे संकटों से निपटने के लिए साझेदारों का संयुक्त बीमा करवाया जा सकता है जिससे किसी साझेदार की मृत्यु होने पर प्राप्त राशि से फर्म से उसके हिस्से को चुकाया जा सकता है वह दूसरी और बीमा राशि की पूर्ण नहीं होने से उस बीमा राशि से साझेदारों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं की पूर्ति आसानी से हो जाती है।
दो दोस्तों कैसी लगी आपको हमारे द्वारा बीमा पर दी गई जानकारी अगर आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी पसंद आई हो तो कृपया इस पोस्ट को लाइक करें शेयर करें और अपने दोस्तों के साथ साझा करें।
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